purane mohalle ka sunsaan aangan | पुराने मोहल्ले का सुनसान आँगन

  - Ishrat Afreen
पुरानेमोहल्लेकासुनसानआँगन
मुझेपाकेथाकितनाहैरानआँगन
येतहज़ीबकोपाँवचलनासिखाएँ
समेटेहैंसदियोंकेइम्कानआँगन
वोदीवारसेझाँकतीशोख़आँखें
वोपहरेपेबूढ़ानिगहबानआँगन
कोईजस्तमेंपारकरताहैचौखट
किसीकेलिएइकबयाबानआँगन
किसीकेलिएपाया-ए-तख़्तहैये
किसीकेलिएएकज़िंदानआँगन
सुनारफ़्तारफ़्ताखंडरहोरहेहैं
वोआबादगलियाँवोगुंजानआँगन
किधरजाएँतहज़ीबकीहिजरतोंमें
येबूढेदरख़्तऔरयेवीरानआँगन
  - Ishrat Afreen
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