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Intzar Akhtar
main jis ke li.e hooñ jahaan pe bhi bhari
main jis ke li.e hooñ jahaan pe bhi bhari | मैं जिस के लिए हूँ जहाँ पे भी भारी
- Intzar Akhtar
मैं
जिस
के
लिए
हूँ
जहाँ
पे
भी
भारी
वो
लड़की
मुझे
हल्के
में
ले
रही
है
- Intzar Akhtar
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अपना
सब
कुछ
हार
के
लौट
आए
हो
न
मेरे
पास
मैं
तुम्हें
कहता
भी
रहता
था
कि
दुनिया
तेज़
है
Tehzeeb Hafi
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जिसकी
ख़ातिर
हम
भुला
बैठे
हैं
दुनिया
दोस्तों
से
ही
उन्हें
फ़ुर्सत
नहीं
है
Shashank Shekhar Pathak
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एक
हमें
आवारा
कहना
कोई
बड़ा
इल्ज़ाम
नहीं
दुनिया
वाले
दिल
वालों
को
और
बहुत
कुछ
कहते
हैं
Habib Jalib
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पत्थर
के
इस
जहाँ
में
थी
रोने
लगी
सभा
जब
आदमी
ने
आदमी
को
आदमी
कहा
SHIV SAFAR
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ग़म
और
ख़ुशी
में
फ़र्क़
न
महसूस
हो
जहाँ
मैं
दिल
को
उस
मक़ाम
पे
लाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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मेरे
होंटों
पे
अपनी
प्यास
रख
दो
और
फिर
सोचो
कि
इस
के
बा'द
भी
दुनिया
में
कुछ
पाना
ज़रूरी
है
Waseem Barelvi
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जहाँ
तक
आके
तुम
वापस
गए
हो
वहाँ
अब
तक
कोई
पहुँचा
नहीं
है
Zubair Ali Tabish
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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एक
तरफ़
है
पूरी
दुनिया
एक
तरफ़
है
मेरा
घर
लेकिन
तुमको
बतला
दूँ
मैं
दुनिया
से
है
अच्छा
घर
सब
कमरों
की
दीवारों
पर
तस्वीरें
हैं
बस
तेरी
मुझ
सेे
ज़ियादा
तो
लगता
है
जानेमन
ये
तेरा
घर
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Tanoj Dadhich
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कल
जहाँ
दीवार
थी
है
आज
इक
दर
देखिए
क्या
समाई
थी
भला
दीवाने
के
सर
देखिए
Javed Akhtar
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कोई
पूछे
कि
बतलाओ
किसे
तुम
इश्क़
कहते
हो
तो
कह
देना
उदासी
के
फ़लक
पे
दर्द
का
इक
चाँद
Intzar Akhtar
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ख़ुशी
है
कि
मेरे
दिल
में
ही
रह
रहे
हो
तुम
सितम
है
कि
तुम
को
ढूँढते
फिर
रहे
हैं
हम
Intzar Akhtar
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बड़े
सलीक़े
से
उस
ने
मेरे
दिल
को
तोड़ा
है
उन
बातों
पे
भी
"हाँ"
कह
के
जिन
पे
"नहीं"
कहना
था
Intzar Akhtar
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तब
वो
कंगन
मेरा
पहनती
थी
अब
किसी
की
घड़ी
मुबारक
हो
Intzar Akhtar
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इस
पे
क्या
रोना
कि
तुम
मुझ
को
नहीं
मिल
पाए
लाख
बादल
बरसे,
धरती
कब
मिलेगी
उस
को
Intzar Akhtar
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