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Intzar Akhtar
fakhr se kah saka hooñ main ne ek sitaare ko choo rakha hai
fakhr se kah saka hooñ main ne ek sitaare ko choo rakha hai | फ़ख़्र से कह सकता हूँ मैं ने एक सितारे को छू रक्खा है
- Intzar Akhtar
फ़ख़्र
से
कह
सकता
हूँ
मैं
ने
एक
सितारे
को
छू
रक्खा
है
हाँ-हाँ
वही-वही
जिस
को
तुम
अपने
काँधे
का
तिल
कहती
हो
- Intzar Akhtar
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तू
मोहब्बत
से
कोई
चाल
तो
चल
हार
जाने
का
हौसला
है
मुझे
Ahmad Faraz
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पहले
तो
तुम्हें
जान
पुकारेंगे
यही
लोग
फिर
ख़ुद
ही
तुम्हें
जान
से
मारेंगे
यही
लोग
मुँह
पर
तो
बड़े
फ़ख्र
से
ता'ईद
करेंगे
फिर
पीठ
में
खंज़र
भी
उतारेंगे
यही
लोग
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Ashraf Ali
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हर
एक
लफ़्ज़
के
तेवर
ही
और
होते
हैं
तेरे
नगर
के
सुख़न-वर
ही
और
होते
हैं
तुम्हारी
आँखों
में
वो
बात
ही
नहीं
ऐ
दोस्त
डुबोने
वाले
समुंदर
ही
और
होते
हैं
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Abrar Kashif
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ऐसे
डरे
हुए
हैं
ज़माने
की
चाल
से
घर
में
भी
पाँव
रखते
हैं
हम
तो
सँभाल
कर
Adil Mansuri
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चराग़
दिल
का
मुक़ाबिल
हवा
के
रखते
हैं
हर
एक
हाल
में
तेवर
बला
के
रखते
हैं
Hastimal Hasti
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साल
के
तीन
सौ
पैंसठ
दिन
में
एक
भी
रात
नहीं
है
उसकी
वो
मुझे
छोड़
दे
और
ख़ुश
भी
रहे
इतनी
औक़ात
नहीं
है
उसकी
Muzdum Khan
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ऐसे
तेवर
दुश्मन
ही
के
होते
हैं
पता
करो
ये
लड़की
किस
की
बेटी
है
Zia Mazkoor
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सहने
वाले
को
गर
सब्र
आ
जाए
तो
फिर
समझो
कहने
वालों
की
औक़ात
फ़क़त
दो
कौड़ी
की
है
A R Sahil "Aleeg"
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नाराज़गी
का
मेरी
ये
आलम
है
इन
दिनों
है
बंद
अपने
आप
से
भी
बोल-चाल
यार
Rajesh Reddy
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शाख़ों
से
टूट
जाएँ
वो
पत्ते
नहीं
हैं
हम
आँधी
से
कोई
कह
दे
कि
औक़ात
में
रहे
Rahat Indori
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साथ
तू
है
तो
क्या
से
क्या
हूॅं
मैं
वरना
तो
लाश
हूॅं
ख़ला
हूॅं
मैं
जिस
की
बाँहों
में
जा
के
गिरना
था
उस
की
नज़रों
में
गिर
गया
हूॅं
मैं
इश्क़
में
क्या
ही
हो
सका
मुझ
से
अपनी
इज़्ज़त
गॅंवा
रहा
हूॅं
मैं
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Intzar Akhtar
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हम
ने
दुनिया
भर
में
इक
को
चाहा
शिद्दत
देखिए
और
उसने
दूसरे
को
चाहा
क़िस्मत
देखिए
Intzar Akhtar
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तेरे
होंठ
हैं
दो
ख़ूबसूरत-तरीं
मिसरे
इजाज़त
अगर
हो
शे'र
अपना
बना
लूँ
मैं
Intzar Akhtar
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अब
मेरे
बाद
ऐसा
लड़का
तुम
को
फिर
न
मिलेगा
जो
दौर-ए-कंप्यूटर
में
भी
ख़ून
से
ख़त
लिखता
हो
Intzar Akhtar
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इक
दिन
मुझे
बैठ
कर
आराम
से
पढ़ने
हैं
वो
सारे
ख़त
जो
कभी
तुमने
लिखे
ही
नहीं
Intzar Akhtar
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