raaste kitna thak jaate hain | रस्ते कितना थक जाते हैं

  - Ikram Basra
रस्तेकितनाथकजातेहैं
फिरभीमंज़िलतकजातेहैं
पत्तोंकोआरामनहींहै
कानहवाकेपकजातेहैं
लम्होंकोआसानलेना
लम्हेसदियाँफ़क़जातेहैं
एकतरफ़सेतुमआतेहो
चारोंओरधड़कजातेहैं
एकमोअ'त्तरयादकेझोंके
ताज़ालम्सछिड़कजातेहैं
क़दमोंकीआदतहैयूँँही
सू-ए-यारसरकजातेहैं
जानेदोलोगोंकीबातें
कुछभीकरबकजातेहैं
रस्तागरभीशर्तनहींहै
रस्तेआपभटकजातेहैं
आँखेंचौखटहोजातीहैं
मौसमबे-दस्तकजातेहैं
  - Ikram Basra
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy