door door tak sannaata hai koi nahin hai paas | दूर दूर तक सन्नाटा है कोई नहीं है पास

  - Iftikhar Qaisar
दूरदूरतकसन्नाटाहैकोईनहींहैपास
जादरियाहोंटसेलगजापीलेमेरीप्यास
इश्क़केपहलेपहलेवारसेवोभीटूटगई
इकजोगीकाप्यारआयाउसलड़कीकोरास
रोज़ानापोशाकेंबदलूँऔरख़ुशबूएँभी
मेरेजिस्मसेउतरेनामेरीमिट्टीकीबास
सारेदरियाफूटपड़ेंगेइकदूजेकेबीच
इकदिनकरमिलजाएगीतेरीमेरीप्यास
दिलकेअंदरनाचरहेहैंकितनेशाहहसीन
मेरेइश्क़कीफूटीहैअबरौशनलालकपास
  - Iftikhar Qaisar
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