raushan raushan raushan | रौशन रौशन रौशन

  - Iftikhar Jalib
रौशनरौशनरौशन
आँखेंयूँँमरकूज़हुईहैंजैसेमैंहीमैंहूँ
मुझमेंला-तादादफ़सानेऔरमआनीहैं
मैंसद-हाअसरारछुपाएफिरताहूँ
मैंख़ुश-क़िस्मतहूँमेरेसाथजहान-ए-रंग-ओ-रानाईहै
औरदरीचा-बंदनिहाँ-ख़ानोंसेरूह-ए-यज़्दाँकीख़ुश्बूउठतीहै
मेरासरमशाममोअत्तरकरतीहै
औरमिरीतक़दीरजहाँपरख़ल्क़हुईहै
जोअरमानकिसीकेदिलमेंहैमैंउसकीख़ुश्बूहूँ
वा-हसरतकाअर्ज़समामेंफैलानग़्मा
जबमहबूबतलकजापहुँचे
तोफिरमैंआवाज़नहींरहताहूँ
औरशिरयानोंकाबहताख़ून-ख़राबा
बल्किलफ़्ज़-ए-मुतलक़बनजाताहूँ
आँखेंयूँँमरकूज़हुईहैंजैसेमैंहीमैंहूँऔरनहींहैकोई
सच्चीबातमगरहैइतनी
मैंमुरदारसमुंदरहूँ
एहसासज़ियाँकाझोंकाहै
आँखेंबोलनहींसकतीहैं
औरबदनबीनाईसेमहरूमहुआहै
लेकिनमैंतोअबतकख़्वाब-ज़दातस्वीरेंदेखरहाहूँ
औरसमुंदरकेपर्बतपरठहराजंगल
बीतेगीतोंसेपुरजंगल
अज़लीख़ामोशीकेहालेमेंथर-थरकाँपरहाहै
सदियाँसाएशोख़फ़सीलेंआमन्नासद्दक़ना
ऐ-लो!सूरजचाँदसितारेधरतीकेसीनेपरउतरे
मेरीराहगुज़रपरबिखरे
हल्कीमद्धमऔरमुसलसलहरकत
मंज़िलफूलकँवलकाफूलअदमकेबहर-ए-बे-पायाँमें
तन्हाझूले
बाहरपरमरकूज़निगाहोंसेमख़्फ़ीलफ़्ज़-ए-मुतलक़
तन्हाऔरउदासकँवलपरझिलमिलझिलमिलफूटबहा
मौहूमरिदा-ए-कोह-ओ-दश्त-ओ-दमन
दुनिया-ए-मन-ओ-तूपरछाई
फीकीफीकीहोकरफैलगईधूलबनी
अपनागाँव,गोरीकेपाँवतकधुँदलाए
फैलीरौशनऔरनिरालीधुँद,औरधुँदऔरधुँद
  - Iftikhar Jalib
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