ham apne raftagaan ko yaad rakhna chahte hain | हम अपने रफ़्तगाँ को याद रखना चाहते हैं

  - Iftikhar Arif
हमअपनेरफ़्तगाँकोयादरखनाचाहतेहैं
दिलोंकोदर्दसेआबादरखनाचाहतेहैं
मुबादामुंदमिलज़ख़्मोंकीसूरतभूलहीजाएँ
अभीकुछदिनयेघरबर्बादरखनाचाहतेहैं
बहुतरौनक़थीउनकेदमक़दमसेशहर-ए-जाँमें
वहीरौनक़हमउनकेबा'दरखनाचाहतेहैं
बहुतमुश्किलज़मानोंमेंभीहमअहल-ए-मोहब्बत
वफ़ापरइश्क़कीबुनियादरखनाचाहतेहैं
सरोंमेंएकहीसौदाकिलौदेनेलगेख़ाक
उमीदेंहस्ब-ए-इस्तेदादरखनाचाहतेहैं
कहींऐसाहोहर्फ़-ए-दुआमफ़्हूमखोदे
दु'आकोसूरत-ए-फ़रियादरखनाचाहतेहैं
क़लमआलूदा-ए-नान-ओ-नमकरहताहैफिरभी
जहाँतकहोसकेआज़ादरखनाचाहतेहैं
  - Iftikhar Arif
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