qurbaan jaaun husn-e-qamar intisaab ke | क़ुर्बान जाऊँ हुस्न-ए-क़मर इंतिसाब के

  - Iftikhar Ahmad Fakhr
क़ुर्बानजाऊँहुस्न-ए-क़मरइंतिसाबके
आरिज़हैंयाहैंफूलशगुफ़्तागुलाबके
अबदिनकहाँरहेवोहमारेसबातके
इकधूपथीजोसाथगईआफ़्ताबके
हरइकअदामेंउसकीहैक़ौस-ए-क़ुज़हकारंग
हैगुफ़्तुगूमेंकितनेहवालेकिताबके
हालातनेझिंझोड़केहोशियारतोकिया
जागेहुएहैंफिरभीतोआसारख़्वाबके
फैलाचुकेहैंफ़िरक़ा-परस्तीकाज़हरवो
आएहैंसामनेजोअददइंतिख़ाबके
गोलीसेहलहोंगेमोहब्बतसेहोंगेहल
क़ज़िएहोंकाश्मीरकेयापंज-आबके
निकलीसरोंकीफ़स्लहैगोभीकेखेतसे
खिलतेजहाँयेफूलथेकलतकगुलाबके
पीर-ए-मुग़ाँसे'फ़ख़्र'यहीइकसवालहै
औंधेहैंआजजाम-ओ-सुबूक्यूँँशराबके
  - Iftikhar Ahmad Fakhr
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