zehan o dil ke faasle the ham jinhen sahte rahe | ज़ेहन ओ दिल के फ़ासले थे हम जिन्हें सहते रहे

  - Iffat Zarrin
ज़ेहनदिलकेफ़ासलेथेहमजिन्हेंसहतेरहे
एकहीघरमेंबहुतसेअजनबीरहतेरहे
दूरतकसाहिलपेदिलकेआबलोंकाअक्सथा
कश्तियाँशोलोंकीदरियामोमकेबहतेरहे
कैसेपहुँचेमंज़िलोंतकवहशतोंकेक़ाफ़िले
हमसराबोंसेसफ़रकीदास्ताँकहतेरहे
आनेवालेमौसमोंकोताज़गीमिलतीगई
अपनीफ़स्ल-ए-आरज़ूकोहमख़िज़ाँकहतेरहे
कैसेमिटपाएँगी'ज़र्रीं'येहदेंअफ़्कारकी
टूटकरदिलकेकिनारेदूरतकबहतेरहे
  - Iffat Zarrin
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