उजलत को इख़्तियार न कर इंतिज़ार कर

  - Idris Azad
उजलतकोइख़्तियारकरइंतिज़ारकर
ख़ुदपरजुनूँसवारकरइंतिज़ारकर
येइज़्तिरारज़ोफ़-ए-जुनूँकीदलीलहै
यूँँख़ुदकोबे-क़रारकरइंतिज़ारकर
मानाकिशहर-ए-दिलकीफ़सीलोंमेंछेदहैं
क़ाएमअभीहिसारकरइंतिज़ारकर
बेटायेउम्रताबतलबकाटनेकीहै
इसकम-सिनीमेंप्यारकरइंतिज़ारकर
मुमकिनहैशैख़-ए-जाँकीतजल्लीफ़रेबहो
दुनिया-ओ-दींनिसारकरइंतिज़ारकर
होंगेज़रूरख़त्मयेदर्दोंकेसिलसिले
दरिया-ए-सब्रपारकरइंतिज़ारकर
रज़्म-ए-वफ़ामेंसहकेदिखातीर-ए-तंज़को
तेग़-ए-ज़बाँसेवारकरइंतिज़ारकर
कहकहकेबारबारजुदाईकीबातको
तूऔरपाएदारकरइंतिज़ारकर
दश्त-ए-जुनूँअभीहैग़ुबार-ए-हवासेमें
यूँँशुतुरबे-महारकरइंतिज़ारकर
'आज़ाद'होगएहैंअसीरान-ए-रास्ती
अबदिलकाए'तिबारकरइंतिज़ारकर
  - Idris Azad
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