ai mausam-e-junoon ye ajab tarz-e-qatl hai | ऐ मौसम-ए-जुनूँ ये अजब तर्ज़-ए-क़त्ल है

  - Ibrat Machlishahri
मौसम-ए-जुनूँयेअजबतर्ज़-ए-क़त्लहै
इंसानियतकेखेतोंमेंलाशोंकीफ़स्लहै
अपनेलहूकारंगभीपहचानतीनहीं
इंसानकेनसीबमेंअंधोंकीनस्लहै
मुंसिफ़तोफ़ैसलोंकीतिजारतमेंलगगए
अबजानेकिससेहमकोतक़ाज़ा-ए-अद्लहै
दुश्मनकाहौसलाकभीइतनाक़वीथा
मेरेतबाहहोनेमेंतेराभीदख़्लहै
लड़तेभीहैंतोप्यारसेमुँहमोड़तेनहीं
हमसेकहींज़ियादातोबच्चोंमेंअक़्लहै
तारीख़कहरहीहैकिचेहराबदलगया
इंसानहैमुसिरकिवहीअपनीशक्लहै
दावा-ए-ख़ूँ-बहातज़ल्लुमएहतिजाज
किसबे-नवा-ए-वक़्तका'इबरत'येक़त्लहै
  - Ibrat Machlishahri
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy