doosra ishq mirii jaan nahin kar saka | दूसरा इश्क़ मिरी जान नहीं कर सकता

  - Ibraheem Hammad
दूसराइश्क़मिरीजाननहींकरसकता
येतिराहाफ़िज़-ए-क़ुरआननहींकरसकता
ऐसीहालतमेंतिरेख़्वाबसेलौटाहैयेजिस्म
मैंअभीवस्लकासामाननहींकरसकता
दस्तरसमेंहैमिरीकैफ़भीकैफ़ियतभी
ज़ख़्मभरकरमुझेहैराननहींकरसकता
उनपेग़ालिबहैकईचेहरोंकेइशराक़कादीन
तूइनआँखोंकोमुसलमाननहींकरसकता
पहलीक़िस्तोंमेंतिरीमौतनहींहोसकती
अपनेथेटरकोमेंवीराननहींकरसकता
येमिराआख़िरीपत्थरहैतिरीयादमेंदोस्त
अबमैंपानीकोपरेशाननहींकरसकता
  - Ibraheem Hammad
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy