ha | हमें तुम पे गुमान-ए-वहशत था हम लोगों को रुस्वा किया तुम ने

  - Ibn E Insha
हमेंतुमपेगुमान-ए-वहशतथाहमलोगोंकोरुस्वाकियातुमने
अभीफ़स्लगुलोंकीनहींगुज़रीक्यूँँदामन-ए-चाकसियातुमने
इसशहरकेलोगबड़ेहीसख़ीबड़ामानकरेंदरवेशोंका
परतुमसेतोइतनेबरहमहैंक्याआनकेमाँगलियातुमने
किनराहोंसेहोकरआईहोकिसगुलकासंदेसालाईहो
हमबाग़मेंख़ुशख़ुशबैठेथेक्याकरदियाकेसबातुमने
वोजोक़ैसग़रीबथेउनकाजुनूँसभीकहतेहैंहमसेरहाहैफ़ुज़ूँ
हमेंदेखकेहँसतोदियातुमनेकभीदेखेहैंअहल-ए-वफ़ातुमने
ग़म-ए-इश्क़मेंकारीदवादु'आयेहैरोगकठिनयेहैदर्दबुरा
हमकरतेजोअपनेसेहोसकताकभीहमसेभीकुछकहातुमने
अबरह-रव-ए-माँदासकुछकहोहाँशादरहोआबादरहो
बड़ीदेरसेयादकियातुमनेबड़ीदर्दसेदीहैसदातुमने
इकबातकहेंगे'इंशा'-जीतुम्हेंरेख़्ताकहतेउम्रहुई
तुमएकजहाँकाइल्मपढ़ेकोई'मीर'साशे'रकहातुमने
  - Ibn E Insha
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