ai dil waalo ghar se niklo deta daawat-e-aam hai chaand | ऐ दिल वालो घर से निकलो देता दावत-ए-आम है चाँद

  - Ibn E Insha
दिलवालोघरसेनिकलोदेतादावत-ए-आमहैचाँद
शहरोंशहरोंक़रियोंक़रियोंवहशतकापैग़ामहैचाँद
तूभीहरेदरीचेवालीजाबर-सर-ए-बामहैचाँद
हरकोईजगमेंख़ुदसाढूँडेतुझबिनबसेआरामहैचाँद
सखियोंसेकबसखियाँअपनेजीकेभेदछुपातीहैं
हमसेनहींतोउससेकहदेकरताकहाँकलामहैचाँद
जिसजिससेउसेरब्तरहाहैऔरभीलोगहज़ारोंहैं
एकतुझीकोबे-मेहरीकादेताक्यूँँइल्ज़ामहैचाँद
वोजोतेरादाग़ग़ुलामीमाथेपरलिएफिरताहै
उसकानामतो'इंशा'ठहरानाहक़कोबदनामहैचाँद
हमसेभीदोबातेंकरलेकैसीभीगीशामहैचाँद
सबकुछसुनलेआपबोलेतेराख़ूबनिज़ामहैचाँद
हमइसलम्बे-चौड़ेघरमेंशबकोतन्हाहोतेहैं
देखकिसीदिनमिलहमसेहमकोतुझसेकामहैचाँद
अपनेदिलकेमश्रिक-ओ-मग़रिबउसकेरुख़सेमुनव्वरहैं
बे-शकतेरारूपभीकामिलबे-शकतूभीतमामहैचाँद
तुझकोतोहरशामफ़लकपरघटता-बढ़तादेखतेहैं
उसकोदेखकेईदकरेंगेअपनाऔरइस्लामहैचाँद
  - Ibn E Insha
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy