kisi roz to ghar se jaana padega | किसी रोज़ तो घर से जाना पड़ेगा

  - SAAGAR SINGH RAJPUT
किसीरोज़तोघरसेजानापड़ेगा
कहींयारजाकरकमानापड़ेगा
रुलानामुझेज़िंदगीचाहतीहै
मुझेज़ोरसेमुस्कुरानापड़ेगा
तुझेदिलकिसीकाअगरजीतनाहै
तुझेदिलकोअपनेहरानापड़ेगा
क़लमशे'रअच्छेनहींलिखरहीहै
इसेख़ूनग़मकापिलानापड़ेगा
कबूतरकीदुनियाअलगथीअलगहै
उसेघरअलगहीबनानापड़ेगा
मिरादिलउसेभूलताहीनहींहै
मुझेदिलकोथोड़ाडरानापड़ेगा
कईरोज़सेकुछउदासीहैछाई
मुझेदिलकिसीसेलगानापड़ेगा
परिंदामिराबे-वफ़ाहोगयाहै
नशेमननहींअबबनानापड़ेगा
अभीकहरहाथाशजरएकमुझसेे
बग़लकेशजरकोगिरानापड़ेगा
कभीझूठ'सागर'नहींबोलताहै
क़समखाकेसबकोबतानापड़ेगा
  - SAAGAR SINGH RAJPUT
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