zaraa bhi dil men nahin hai chubhan bichhadne kii | ज़रा भी दिल में नहीं है चुभन बिछड़ने की

  - Dhirendra Pratap Singh
ज़राभीदिलमेंनहींहैचुभनबिछड़नेकी
वगरनामाथेपेहोतीशिकनबिछड़नेकी
अधरभीउसपरीकेआजतकनहींचू
में
बतारहीहैजोकारणबदनबिछड़नेकी
अभीतोमिलनेभीवोमाह-रूनहींआई
अभीसेहोरहीतुमकोघुटनबिछड़नेकी
वोलौटआएगाउसकीनज़रबतारहीहै
पसंदआयाहैउसकोछुअनबिछड़नेकी
जबईदआतीहैपरदेशमेंतोमिलकेगले
मनातेहैसभीमातमवतनबिछड़नेकी
हमारेपाँवकेछालोंसेगरजानसको
तोझुर्रियाँबतादेंगीथकनबिछड़नेकी
विरहकीआगमेंधीरेन्द्रक्यूँझुलसरहेहो
लगीथीतुमकोहीपहलेअगनबिछड़नेकी
  - Dhirendra Pratap Singh
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