ये जज़्बा-ए-तलब तो मिरा मर न जाएगा

  - Hayat Lakhnavi
येजज़्बा-ए-तलबतोमिरामरजाएगा
तुमभीअगरमिलोगेतोजीभरजाएगा
येइल्तिजादु'आयेतमन्नाफ़ुज़ूलहै
सूखीनदीकेपाससमुंदरजाएगा
जिसज़ाविएसेचाहोमिरीसम्तफेंकदो
मुझसेमिलेबग़ैरयेपत्थरजाएगा
दम-भरकेवास्तेहैंबहारेंसमेटलो
वीरानियोंकोछोड़केमंज़रजाएगा
यूँँख़ुशहैअपनेघरकीफ़ज़ाओंकोछोड़कर
जैसेवोज़िंदगीमेंकभीघरजाएगा
उसकोबुलंदियोंमेंमुसलसलउछालिए
लेकिनवोअपनीसतहासेऊपरजाएगा
शहर-ए-मुरादमिलभीगयाअबतोक्या'हयात'
मायूसियोंकादिलसेकभीडरजाएगा
  - Hayat Lakhnavi
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