silsila badnaseebi ka sab yuñ hi dhara rah jaayega | सिलसिला ख़्वाबों का सब यूँँ ही धरा रह जाएगा

  - Hayat Lakhnavi
सिलसिलाख़्वाबोंकासबयूँँहीधरारहजाएगा
एकदिनबिस्तरपेकोईजागतारहजाएगा
एकख़्वाहिशदिलकोग़ैर-आबादकरतीजाएगी
इकपरिंदादूरतकउड़ताहुआरहजाएगा
चार-सूफैलीहुईबे-चेहरगीकीधुंदमें
एकदिनबे-अक्सहोकरआइनारहजाएगा
हरसदासबचकेवोएहसास-ए-तन्हाईमेंहै
अपनेहीदीवार-ओ-दरमेंगूँजतारहजाएगा
मुद्दआहमअपनाकाग़ज़पररक़मकरजाएँगे
वक़्तकेहाथोंमेंअपनाफ़ैसलारहजाएगा
दोघड़ीकेवास्तेकरचलेजाओगेतुम
फिरमिरीतन्हाइयोंकासिलसिलारहजाएगा
अबदिलोंमेंकोईगुंजाइशनहींमिलती'हयात'
बसकिताबोंमेंलिखाहर्फ़-ए-वफ़ारहजाएगा
  - Hayat Lakhnavi
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