husn-e-be-parwa ko khud-been o khud-aara kar diya | हुस्न-ए-बे-परवा को ख़ुद-बीन ओ ख़ुद-आरा कर दिया

  - Hasrat Mohani
हुस्न-ए-बे-परवाकोख़ुद-बीनख़ुद-आराकरदिया
क्याकियामैंनेकिइज़हार-ए-तमन्नाकरदिया
बढ़गईंतुमसेतोमिलकरऔरभीबेताबियाँ
हमयेसमझेथेकिअबदिलकोशकेबाकरदिया
पढ़केतेराख़तमिरेदिलकीअजबहालतहुई
इज़्तिराब-ए-शौक़नेइकहश्रबरपाकरदिया
हमरहेयाँतकतिरीख़िदमतमेंसरगर्म-ए-नियाज़
तुझकोआख़िरआश्ना-ए-नाज़-ए-बेजाकरदिया
अबनहींदिलकोकिसीसूरतकिसीपहलूक़रार
उसनिगाह-ए-नाज़नेक्यासेहरऐसाकरदिया
इश्क़सेतेरेबढ़ेक्याक्यादिलोंकेमर्तबे
मेहरज़र्रोंकोकियाक़तरोंकोदरियाकरदिया
क्यूँँहोतेरीमोहब्बतसेमुनव्वरजानदिल
शम्अजबरौशनहुईघरमेंउजालाकरदिया
तेरीमहफ़िलसेउठाताग़ैरमुझकोक्यामजाल
देखताथामैंकितूनेभीइशाराकरदिया
सबग़लतकहतेथेलुत्फ़-ए-यारकोवजह-ए-सुकूँ
दर्द-ए-दिलउसनेतो'हसरत'औरदूनाकरदिया
  - Hasrat Mohani
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