dil men kya kya hawas-e-deed badhaai na gaii | दिल में क्या क्या हवस-ए-दीद बढ़ाई न गई

  - Hasrat Mohani
दिलमेंक्याक्याहवस-ए-दीदबढ़ाईगई
रू-ब-रूउनकेमगरआँखउठाईगई
हमरज़ा-शेवाहैंतावील-ए-सितमख़ुदकरलें
क्याहुआउनसेअगरबातबनाईगई
येभीआदाब-ए-मोहब्बतनेगवाराकिया
उनकीतस्वीरभीआँखोंसेलगाईगई
आहवोआँखजोहरसम्तरहीसाइक़ा-पाश
वोजोमुझसेकिसीउनवानमिलाईगई
हमसेपूछागयानाम-ओ-निशाँभीउनका
जुस्तुजूकीकोईतम्हीदउठाईगई
दिलकोथाहौसला-ए-अर्ज़-ए-तमन्नासोउन्हें
सरगुज़िश्त-ए-शब-ए-हिज्राँभीसुनाईगई
ग़म-ए-दूरीनेकशाकशतोबहुतकीलेकिन
यादउनकीदिल-ए-'हसरत'सेभुलाईगई
  - Hasrat Mohani
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