हर ज़ख़्म-ए-दिल से अंजुमन-आराई माँग लो

  - Hasan Najmi Sikandarpuri
हरज़ख़्म-ए-दिलसेअंजुमन-आराईमाँगलो
फिरशहर-ए-पुर-हुजूमसेतन्हाईमाँगलो
मौसमकाज़ुल्मसहतेहैंकिसख़ामुशीकेसाथ
तुमपत्थरोंसेतर्ज़-ए-शकेबाईमाँगलो
हुस्न-ए-तअल्लुक़ातकीजोयादगारथे
माज़ीसेऐसेलम्होंकीरा'नाईमाँगलो
माँगोसमुंदरोंसेसाहिलकीभीकतुम
हाँफ़िक्र-ओ-फ़नकेवास्तेगहराईमाँगलो
समझोउन्हेंजोदेतेहैंयेमशवरातुम्हें
नर्गिससेहाथजोड़केबीनाईमाँगलो
वोसोकेज्यूँँहीउट्ठेंपहुँचजाओउनकेपास
औरउनसेइंक़लाबकीअंगड़ाईमाँगलो
'नजमी'सुनाहैतुमपेभीमौसमहैमेहरबाँ
बाद-ए-सुमूमसेकभीपुर्वाईमाँगलो
  - Hasan Najmi Sikandarpuri
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