hasi khanakti hui ya bujhi-bujhi khushiyaan | हँसी खनकती हुई या बुझी-बुझी ख़ुशियां

  - Hasan Akbar Kamal
हँसीखनकतीहुईयाबुझी-बुझीख़ुशियां
हैंदोस्तीकीमहकसेरचीहुईघड़ियां
मज़ाअनोखासाहैआते-जातेलमहोंमें
किताबेंगोदमेंफैलींहैंखोएबातोंमें
रफ़ाक़तोंमेंख़ज़ानाक्यूँँंहमनेपायाहै
दिलपेबोझहैकोईनाग़मकासायाहै
हमेंयेधुनहैकिख़ुश्बूकोहमतोदेखेंगे
यक़ीनहैकिसितारोंकोबढ़केछूलेगें
खुलायेराज़बिछड़नाभीथाबहारोंको
किसीकेहाथनहींछूसकेसितारोंको
कभीदरीचोंमेंशम्मेंजोहमजलातेहैं
तोगीतलहजेख़यालोंमेंगुनगुनातेहैं
  - Hasan Akbar Kamal
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