kisi ke hijr men yuñ toot kar roya nahin karte | किसी के हिज्र में यूँँ टूट कर रोया नहीं करते

  - Hasan Abbas Raza
किसीकेहिज्रमेंयूँँटूटकररोयानहींकरते
येअपनारंजहैऔररंजकाचर्चानहींकरते
जुदाईकीरुतोंमेंसूरतेंधुँदलानेलगतीहैं
सोऐसेमौसमोंमेंआइनादेखानहींकरते
ज़ियादासज़ियादादिलबिछादेतेहैंरस्तेमें
मगरजिसनेबिछड़नाहोउसेरोकानहींकरते
हमेशाइकमसाफ़तघूमतीरहतीहैपाँवमें
सफ़रकेब'अदभीकुछलोगघरपहुँचानहींकरते
तनीरस्सीपेदरियापारउतरनाहीमुक़द्दरहो
तोफिरसीनोंमेंगर्क़ाबीकाडररक्खानहींकरते
हमेंरुस्वाकियाइसनींदमेंचलनेकीआदतने
वगरनाजागतेमेंहमकभीऐसानहींकरते
'हसन'जबलड़खड़ाकरअपनेहीपाँवपेगिरनाहो
तोफिरएड़ीपेइतनीदेरतकघूमानहींकरते
  - Hasan Abbas Raza
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy