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Harsh Raj
har gali men baat ye mashhoor hai
har gali men baat ye mashhoor hai | हर गली में बात ये मशहूर है
- Harsh Raj
हर
गली
में
बात
ये
मशहूर
है
भेष
में
इंसान
के
तू
हूर
है
कुछ
नहीं
पाने
को
बचता
और
जब
वो
हसीना
ज़िन्दगी
की
नूर
है
उस
से
जब
भी
बात
होने
लगती
है
फिर
नहीं
लगता
सफ़र
अब
दूर
है
तुम
रगड़
लो
नाक
चाहे
जितना
भी
होगा
वो
जो
लिक्खा
बा-दस्तूर
है
इक
तरफ़
हर
शै
से
दिक्कत
है
तुम्हें
इक
तरफ़
कहते
हो
सब
मंज़ूर
है
मैं
उसे
दिल
देने
को
तैयार
हूँ
ख़र्चने
पे
मुझको
जो
मग़रूर
है
- Harsh Raj
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दुख
और
कष्टों
से
तो
बेहतर
मौत
मिल
जाए
उन्हें
बिस्तर
पे
मजबूरन
जिन्हें
बिन
शौक
रहना
पड़ता
है
Harsh Raj
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ज़रा
सी
आँच
से
ये
टूट
जाएगा
तुम्हें
क्या
ही
पता
है
हाले
दिल
मेरा
Harsh Raj
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बिल्ली
ने
रस्ता
काटा
तो
मेरे
लिए
अच्छा
हुआ
जो
काम
था
वो
तो
नहीं
दीदार
पर
उनका
हुआ
Harsh Raj
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बताओ
गर
कोई
बेजान
है
तो
फिर
मिलो
उस
से
किसी
भी
जिस्म
में
वो
जान
छू
कर
डाल
सकती
है
Harsh Raj
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मेरा
जो
भी
है
सबब-ए-ग़म
तू
ही
है
और
उसपे
ये
सितम
मरहम
तू
ही
है
हो
मेरी
कितनों
से
भी
बातें
हुआ
क्या
एक
ही
है
पर
मेरा
हमदम
तू
ही
है
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Harsh Raj
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