wafadari kii qasmen kha rahe hain | वफ़ादारी की क़स

  - Harsh saxena
वफ़ादारीकीक़स
मेंखारहेहैं
उन्हेंखोनेसेहमघबरारहेहैं
किसीकीसादगीकाहैकरिश्मा
किहमअबहुस्नसेकतरारहेहैं
नएमज़मूनपानेकीतलबमें
उन्हेंदिनभरनिहारेजारहेहैं
तुम्हारेपाँवजिनपरपड़गएथे
वहीपत्थरतोपूजेजारहेहैं
हिफ़ाज़तसेउन्हेंता-उम्ररखना
तुम्हारेऐबजोगिनवारहेहैं
दिवानेइम्तिहान-ए-इश्क़में‘हर्ष’
हमारेशे'रपढ़कररहेहैं
  - Harsh saxena
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