kisi ki yaad men likkha hai jo kuchh | किसी की याद में लिक्खा है जो कुछ

  - Hafeez Shahid
किसीकीयादमेंलिक्खाहैजोकुछ
यहीकुछहैमिराअपनाहैजोकुछ
उसीकाअक्सहैलफ़्ज़ोंमेंमेरे
नज़रकेसामनेदुनियाहैजोकुछ
ज़रूरत-मंदहूँमुझकोअताकर
सखीदातामिराहिस्साहैजोकुछ
चुरालेजाएगीबाद-ए-सबाभी
छुपाकरफूलनेरक्खाहैजोकुछ
मुक़द्दरहैइसीकानामशायद
मुझेवोबे-तलबदेताहैजोकुछ
बतादेंगीहवाएँहरकिसीको
लब-ए-अश्जारपरक़िस्साहैजोकुछ
मह-ओ-ख़ुर्शीदतोकुछभीनहींहैं
मिरीमिट्टीकाइकज़र्राहैजोकुछ
किसीदिनवोभीलेजाएगाकोई
सर-ए-बाज़ार-ए-जाँसौदाहैजोकुछ
कहाँतकमैंतजस्सुसमेंरहूँगा
उठादोदरमियाँपर्दाहैजोकुछ
नहींसूझाजोअबउसकाअभीतक
किसीकीआँखनेपूछाहैजोकुछ
नहींकुछऔरपानेकीतमन्ना
ग़नीमतहैयहाँपायाहैजोकुछ
उसेतहरीरकरताजारहाहूँ
मिरीसोचोंकाअफ़्सानाहैजोकुछ
भँवरहोंयाख़स-ओ-ख़ाशाक'शाहिद'
हमाराहैसर-ए-दरियाहैजोकुछ
  - Hafeez Shahid
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