ab kya kahein jo mausam-e-gulshan ka haal hai | अब क्या कहें जो मौसम-ए-गुलशन का हाल है

  - Hafeez Shahid
अबक्याकहेंजोमौसम-ए-गुलशनकाहालहै
फूलोंसेराब्तासबाकाख़यालहै
हरआरज़ूकीआँखमेंआँसूलहूकेहैं
किसकायेदिलकेशहरमेंयौम-ए-विसालहै
मुझकोकियाथाक़ैदी-ए-तक़दीरकिसलिए
क़ुदरतसेइंतिज़ार-ए-जवाब-ओ-सवालहै
जज़्बोंकीअंजुमनमेंउसीकीहैरौशनी
गुल-हा-ए-आरज़ूमेंउसीकाजमालहै
जोबुख़्लसेकियाहैइकट्ठातमामउम्र
तेरानहींहैवोतिरेबेटोंकामालहै
हरगोशा-ए-ज़मींपेज़राग़ौरसेपढ़ो
लिक्खीजोदास्तान-ए-उरूज-ओ-ज़वालहै
'शाहिद'वोपूछतेहैंमिराहालक्याकहूँ
जैसाथापिछलेसालवहीअबकेसालहै
  - Hafeez Shahid
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