jab dasht-e-tamanna men koi phool khila hai | जब दश्त-ए-तमन्ना में कोई फूल खिला है

  - Hafeez Betab
जबदश्त-ए-तमन्नामेंकोईफूलखिलाहै
शहर-ए-दिल-ए-ख़ामोशसेइकशोरउठाहै
आँखोंमेंखंडरहोंटोंपेइकभूलाहुआनाम
चाहतमेंकिसीकीयेअजबहालहुआहै
फिरयादोंकीदहलीज़पेजलउट्ठीहैंशमएँ
फिरपलकोंपेबिखराहुआइकख़्वाबसजाहै
हरसाँसहोतलवारसीजैसेरग-ए-जाँपर
जीनाभीयहाँनामकिसीमो'जिज़ेकाहै
ख़ामोशबहुतदेरसेहैबहर-ए-हवादिस
तूफ़ानतह-ए-आबकोईखौलरहाहै
तुमचाहोतोयेआख़िरीसरमायाभीलेलो
इकदर्दकीदौलतकेसिवापासहीक्याहै
'बेताब'बरसजानेदोआँखोंकायेसावन
तिनकोंकाबदनशो'लोंकीबाहोंमेंघिराहै
  - Hafeez Betab
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