jab bhi tiri yaadon ki chalne lagii purvaai | जब भी तिरी यादों की चलने लगी पुर्वाई

  - Hafeez Banarasi
जबभीतिरीयादोंकीचलनेलगीपुर्वाई
हरज़ख़्महुआताज़ाहरचोटउभरआई
इसबातपेहैराँहैंसाहिलकेतमाशाई
इकटूटीहुईकश्तीहरमौजसेटकराई
मयख़ानेतकपहुँचीइंसाफ़कीरुस्वाई
साक़ीसेहुईलग़्ज़िशरिंदोंनेसज़ापाई
हंगामाहुआबरपाइकजामअगरटूटा
दिलटूटगएलाखोंआवाज़नहींआई
इकरातबसरकरलेंआरामसेदीवाने
ऐसाभीकोईवा'दाजान-ए-शकेबाई
किसदर्जासितम-गरहैयेगर्दिश-ए-दौराँभी
ख़ुदआजतमाशाहैंकलथेजोतमाशाई
क्याजानिएक्याग़मथामिलकरभीयेआलमथा
बे-ख़्वाबरहेवोभीहमकोभीनींदआई
  - Hafeez Banarasi
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