dard sa uth ke na rah jaa.e kahii dil ke qareeb | दर्द सा उठ के न रह जाए कहीं दिल के क़रीब

  - Hadi Machlishahri
दर्दसाउठकेरहजाएकहींदिलकेक़रीब
मेरीकश्तीकहींग़र्क़होसाहिलकेक़रीब
वज्दमेंरूहहैऔररक़्समेंहैपा-ए-तलब
देखिएहालमिरेशौक़कामंज़िलकेक़रीब
रहगयाथाजोकभीपा-ए-तलबमेंचुभकर
अबवहीख़ार-ए-तमन्नाहैरग-ए-दिलकेक़रीब
अबवोपीरीमेंकहाँअहद-ए-जवानीकीउमंग
रंगमौजोंकाबदलजाताहैसाहिलकेक़रीब
जज़्बा-ए-शौक़भीकुछकामआया'हादी'
ना-तवानीनेबिठायामुझेमंज़िलकेक़रीब
  - Hadi Machlishahri
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