bahut raushan hai shaam-e-gham hamaari | बहुत रौशन है शाम-ए-ग़म हमारी

  - Habib Jalib
बहुतरौशनहैशाम-ए-ग़महमारी
किसीकीयादहैहमदमहमारी
ग़लतहैला-तअल्लुक़हैंचमनसे
तुम्हारेफूलऔरशबनमहमारी
येपलकोंपरनएआँसूनहींहैं
अज़लसेआँखहैपुर-नमहमारी
हरइकलबपरतबस्सुमदेखनेकी
तमन्नाकबहुईहैकमहमारी
कहीहैहमनेख़ुदसेभीबहुतकम
पूछोदास्तान-ए-ग़महमारी
  - Habib Jalib
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