firaq men dam uljh raha hai khayaal-e-gesoo men jaankanee hai | फ़िराक़ में दम उलझ रहा है ख़याल-ए-गेसू में जांकनी है

  - Habeeb Moosavi
फ़िराक़मेंदमउलझरहाहैख़याल-ए-गेसूमेंजांकनीहै
तनाब-ए-जल्लादकीतरहसेरग-ए-गुलूआज-कलतनीहै
नहींहैपर्वा-ए-माल-ओ-दौलतसफ़ा-ए-बातिनसेदिलग़नीहै
गदाहैंहाजत-रवा-ए-सुल्ताँयेकीमिया-ए-फ़रोतनीहै
जिगरमेंहैंदाग़-ए-महर-ओ-उल्फ़तशिगाफ़-ए-पहलूहैजेब-ए-मशरिक़
शब-ए-लहदहैकिसुब्ह-ए-महशरयेकिसक़यामतकीरौशनीहै
फ़ज़ाएल-ए-इत्तिहाद-ए-मिल्लतजहाँमेंवज्ह-ए-मुख़ालिफ़तहैं
मुआ'फ़हीरखिएशैख़साहबयेरहबरीहैकिरहज़नीहै
ग़रज़रक्खेमय-ए-जहाँसेतोहमभीक़ाइलहोंतेरेवाइज़
कमालक्याजबउम्मीद-ए-फ़र्दाहीइल्लत-ए-पाक-दामनीहै
हमेंरासआयादिललगानाग़ज़बहुआफिरगयाज़माना
कोईतोकहताहैक़ैदकरदोकोईयेकहताहैकुश्तनीहै
रक़ीबकोपासगरबिठायातोमुझसेहरगिज़ज़ब्तहोगा
मिटाहीदूँएकदिनयेझगड़ाबसअबतोदिलमेंयहीठनीहै
कोईकिसीसेदिललगाएसरपेकोह-ए-अलमउठाए
नहींभरोसाख़ुदाबचाएकिइश्क़मेंजानपरबनीहै
खपीहैदिलमेंहँसीतुम्हारीफ़िराक़मेंकौंदतीहैबिजली
रहेंक्यूँँअश्क-ए-सुर्ख़जारीजिगरमेंअल्मासकीकनीहै
कभीतोमेरेरश्क-ए-ईसाहुईहैमुज़मिनतप-ए-जुदाई
नहींशिफ़ाकीउम्मीदबाक़ीनुमूदचेहरेसेमुर्दनीहै
हुआयेलाग़रअसीरतेराकिसबकोहैनक़्श-ए-पाकाधोका
गलेमेंजोतौक़थापहनायावोअबउसेहिस्न-ए-आहनीहै
तेग़-ए-क़ातिलकाक्यूँँहोशोहराकियाहैजोरंग-ए-जिस्मऐसा
दिएजोटाँकेतोहैयेधोकाबदनकामल्बूससोज़नीहै
ज़मीनपरगिरतेगिरतेहमकोसुनागयाकासा-ए-सिफ़ालीं
हुआजहाँदौर-ए-उम्र-ए-आख़िरयेसाज़-ए-हस्तीशिकस्तनीहै
जिगरमेंबरसोंखटकरहेगीफुकेंगेपहलूचमकरहेगी
ख़याल-ए-मिज़्गान-ए-यार-ए-जानीसिनान-ए-दिल-दोज़कीअनीहै
अज़लसेरिंदोंकोमयकीआदतहैऔरवाइज़कीसरज़निशकी
तख़ालुफ़-ए-वज़्असेहैझगड़ादोस्तीहैदुश्मनीहै
'हबीब'पीरीमेंहैंरंगीलीवोसब्ज़ारंगोंहीपरहैंमरते
हुएहैंदोदिनपतानहींहैकिसीसेगहरीकहींछनीहै
  - Habeeb Moosavi
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