falak ki gardishein aisi nahin jin men qadam thehre | फ़लक की गर्दिशें ऐसी नहीं जिन में क़दम ठहरे

  - Habeeb Moosavi
फ़लककीगर्दिशेंऐसीनहींजिनमेंक़दमठहरे
सकूँदुश्वारहैक्यूँँकरतबीअतकोईदमठहरे
क़ज़ानेदोस्तोंसेदेखिएआख़िरकियानादिम
किएथेअहद-ओ-पैमाँजिसक़दरवोकुलअदमठहरे
छुआतूनेजिसेमाराउसेअफ़ई-ए-गेसू
येसबतिरयाक़मेरेतजरबाकरनेमेंसमठहरे
कियाजबग़ौरकोसोंदूरनिकलीमंज़िल-ए-मक़्सद
कभीगरपा-ए-शलउट्ठेतोचलकरदोक़दमठहरे
लगाकरदिलजुदाहोनाथीशर्त-ए-वफ़ासाहब
ग़म-ए-फ़ुर्क़तकीशिद्दतसेकरमजौर-ओ-सितमठहरे
जोकुछदेखावोआईनाथाआनेवालीहालतका
जहाँदेखायहीआँखोंकेकांसेजाम-ए-जमठहरे
अमलकहनेपेअपनेहज़रत-ए-वाइज़करेंपहले
गुनहकेमो'तरिफ़जबहैंतोवोकबमोहतरमठहरे
जवानीकीसियह-मस्तीमेंवस्फ़-ए-ज़ुल्फ़लिक्खाथा
बढ़ावोसिलसिलाऐसाकिहममुश्कींक़लमठहरे
येसाबितहैकिमुतलक़कातअय्युनहोनहींसकता
वोसालिकहीनहींजोचलकेता-दैर-ओ-हरमठहरे
बशरकोक़ैद-ए-कुल्फ़तमाया-ए-अंदोह-ओ-आफ़तहै
रहेअच्छेजोइसमेहमाँ-सरामेंकेकमठहरे
'हबीब'-ए-ना-तवाँसेराह-ए-उल्फ़ततयनहींहोती
अजबक्यागरयेरस्ताजादा-ए-मुल्क-ए-अदमठहरे
  - Habeeb Moosavi
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