dil-e-tanha men ab ehsaas-e-mahroomi nahin shaayad | दिल-ए-तन्हा में अब एहसास-ए-महरूमी नहीं शायद

  - Habeeb Hyderabadi
दिल-ए-तन्हामेंअबएहसास-ए-महरूमीनहींशायद
तिरीदूरीभीअबदिलकेलिएदूरीनहींशायद
जहाँदिनमेंअँधेराहोवहाँरातोंकाक्याकहना
यहाँकेचाँदसूरजमेंचमकहोतीनहींशायद
मैंजबबिस्तरसेउठताहूँतोयूँँमहसूसहोताहै
मिरेअंदरकीदुनियारातभरसोतीनहींशायद
येकिससहराकेकिसगोशेमेंख़ेमातानबैठेहैं
किसीभीसम्तकोईरहगुज़रजातीनहींशायद
हमअपनीज़िंदगीकीधूपमेंतपनेकेआदीहैं
हमेंठंडीहवाबरसोंसेरासआतीनहींशायद
'हबीब'इसज़िंदगीकेपेच-ओ-ख़मसेहमभीनालाँहैं
हमेंझूटेनगीनोंकीचमकभातीनहींशायद
  - Habeeb Hyderabadi
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