be-niyaazi se mudaarat se dar lagta hai | बे-नियाज़ी से मुदारात से डर लगता है

  - Habeeb Ashar Dehlavi
बे-नियाज़ीसेमुदारातसेडरलगताहै
जानेक्याबातहैहरबातसेडरलगताहै
साग़र-ए-बादा-ए-गुल-रंगतोकुछदूरनहीं
निगह-ए-पीर-ए-ख़राबातसेडरलगताहै
दिलपेखाईहुईइकचोटउभरआतीहै
तेरेदीवानेकोबरसातसेडरलगताहै
दिलअफ़साना-ए-आग़ाज़-ए-वफ़ारहनेदे
मुझकोबीतेहुएलम्हातसेडरलगताहै
हाथसेज़ब्तकादामनकहींछुटजाए
आपकीपुर्सिश-ए-हालातसेडरलगताहै
मैंजोउसबज़्ममेंजातानहीं'अशअर'मुझको
अपनेसह
मेंहुएजज़्बातसेडरलगताहै
  - Habeeb Ashar Dehlavi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy