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Harun Umar
vehshat hai mujhko lams ke rizk-e-haraam se
vehshat hai mujhko lams ke rizk-e-haraam se | वहशत है मुझको लम्स के रिज़्क-ए-हराम से
- Harun Umar
वहशत
है
मुझको
लम्स
के
रिज़्क-ए-हराम
से
मुझको
मेरे
नसीब
की
रोज़ी
नहीं
मिली
- Harun Umar
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ज़ुल्म
फिर
ज़ुल्म
है
बढ़ता
है
तो
मिट
जाता
है
ख़ून
फिर
ख़ून
है
टपकेगा
तो
जम
जाएगा
Sahir Ludhianvi
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ओ
सखी
मन
उसका
तो
तन
भी
उसी
का
हक़
है
उसको
ग़ैर
ये
आँगन
न
चू
में
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Neeraj Neer
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यूँँ
ही
हमेशा
उलझती
रही
है
ज़ुल्म
से
ख़ल्क़
न
उनकी
रस्म
नई
है,
न
अपनी
रीत
नई
यूँँ
ही
हमेशा
खिलाए
हैं
हमने
आग
में
फूल
न
उनकी
हार
नई
है,
न
अपनी
जीत
नई
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Faiz Ahmad Faiz
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सर
पर
हवा-ए-ज़ुल्म
चले
सौ
जतन
के
साथ
अपनी
कुलाह
कज
है
उसी
बाँकपन
के
साथ
Majrooh Sultanpuri
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तमाम
मस'अले
उठाए
फिर
रहे
हैं
हम
इसीलिए
भी
चलते
चलते
थक
गए
हैं
हम
थे
कितने
कम-नसीब
हम
कि
राबता
न
था
हैं
कितने
ख़ुशनसीब
तुझ
को
छू
रहे
हैं
हम
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Siddharth Saaz
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और
बेहतर,
और
बेहतर,
और
बेहतर
का
ये
खेल
मुझ
सेे
मेरे
शे'र
की
मासूमियत
ले
जाएगा
Divy Kamaldhwaj
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न
हुआ
नसीब
क़रार-ए-जाँ
हवस-ए-क़रार
भी
अब
नहीं
तिरा
इंतिज़ार
बहुत
किया
तिरा
इंतिज़ार
भी
अब
नहीं
तुझे
क्या
ख़बर
मह-ओ-साल
ने
हमें
कैसे
ज़ख़्म
दिए
यहाँ
तिरी
यादगार
थी
इक
ख़लिश
तिरी
यादगार
भी
अब
नहीं
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Jaun Elia
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तो
डर
रहे
हैं
आप
कहीं
हक़
न
माँग
ले
यानी
कि
सबको
खौफ़
है
औरत
के
नाम
से
Abhishar Geeta Shukla
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मैं
ख़ुद
भी
यार
तुझे
भूलने
के
हक़
में
हूँ
मगर
जो
बीच
में
कम-बख़्त
शा'इरी
है
ना
Afzal Khan
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ज़ालिम
था
वो
और
ज़ुल्म
की
आदत
भी
बहुत
थी
मजबूर
थे
हम
उस
से
मोहब्बत
भी
बहुत
थी
Kaleem Aajiz
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दो
टके
की
हक़ीर
लड़की
से
इश्क़
हम
बेशुमार
करते
थे
Harun Umar
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मेरी
ख़्वाहिश
है
मेरे
मरने
पर
आप
आएँ
भगा
दिए
जाएँ
Harun Umar
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अधूरी
दास्ताँ
वाले
ही
लड़के
मुक़म्मल
शा'इरी
करते
हैं
समझे
Harun Umar
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कल
जो
ढूँढोगे
हमें
हाथ
आएंगी
तन्हाईयाँ
हम
सेे
बाते
करने
की
बस
हसरतें
रह
जायेंगी
Harun Umar
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हमारी
हसरतों
के
दिल
की
छत
पर
मुसलसल
ग़म
की
बारिश
हो
रही
है
Harun Umar
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