अपनीजवानीमें
बिखरीहुईक़ौस-ए-क़ुज़ह
ग़ुरूरमेंफूलेहुएफूल
अहराम-ए-मिस्र
याएकख़ूब-सूरतमहबूबाकेअंदर
एकहाकिमपनपताहै
हरदौरमें
एकचालाकशख़्सज़रूरहोनाचाहिए
जोलोगोंकोबद-सूरतीसेडराकरमहज़ूज़होतारहे
अबमैंख़ूब-सूरतीकेलिएक्यालिखूँ
यही
कितख़लीक़ीमैलानसेज़रापहले
औरबहुतदेरतकबा'दमें
सिर्फ़एकहसीनख़्वाबहोताहै