in bujhte chiraagon ko jala kyuuñ nahin dete | इन बुझते चिराग़ों को जला क्यूँ नहीं देते

  - Gyan Prakash Vivek
इनबुझतेचिराग़ोंकोजलाक्यूँनहींदेते
तहरीरअँधेरोंकीमिटाक्यूँनहींदेते
सुनतानहींआवाज़जोबस्तीमेंतुम्हारी
जंगलमेंखड़ेहोकरसदाक्यूँनहींदेते
हमखानाबदोशोंकाघरहैनाठिकाना
मतपूछोकिहमघरकापताक्यूँनहींदेते
भूचालकीधमकीकाअगरडरहैतोलोगों
इनकच्चेमकानोंकोगिराक्यूँनहींदेते
हरशैकातुम्हेंरूपनज़रआताहैकाला
आँखोंसेसियाहचश्माहटाक्यूँनहींदेते
वोपेड़जोषड्यंत्रकरेधूपसेमिलकर
उसपेड़कोतुमजड़सेगिराक्यूँनहींदेते
  - Gyan Prakash Vivek
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy