ya mila qaum ko KHud apna nigahbaan ho kar | या मिला क़ौम को ख़ुद अपना निगहबाँ हो कर

  - Gulzar Dehlvi
यामिलाक़ौमकोख़ुदअपनानिगहबाँहोकर
सौतरहदेखलियाहमनेपरेशाँहोकर
काफ़िर-ए-इश्क़हीअच्छेथेसनम-ख़ानोंमें
शान-ए-ईमाँमिलीसाहब-ए-ईमाँहोकर
नक़्स-ए-तंज़ीमसेहोतर्क-ए-चमनक्यामा'नी
हमकोरहनाहैयहींतार-ए-रग-ए-जाँहोकर
क्याहुआगरकोईहिन्दूकिमुसलमाँठहरा
आदमियतकानहींपासजोइंसाँहोकर
हमबुझेंभीतोबुझेंमिस्ल-ए-चराग़-ए-सहरी
औरजोरौशनहोंतोहोंशम-ए-शबिस्ताँहोकर
दिलमेंअहबाबकेहमबनकेअसरबैठेंगे
औरउठेंगेइसीगुलशनसेबहाराँहोकर
क्यागुलिस्ताँमेंनयाहुक्म-ए-ज़बाँ-बंदीहै
बाग़बाँभीहुआसय्याद-ए-निगहबाँहोकर
सिद्क़निय्यतसेअगरउसकीचमन-बंदीहो
फिररहेक्यूँँवतनमुल्क-ए-सुलैमाँहोकर
अबहमअपनेलिएख़ुदसूद-ओ-ज़ियाँसोचेंगे
हमकोजीनाहीनहींबंदा-ए-एहसाँहोकर
रश्क-ए-गुलज़ार-ए-इरमअर्ज़-ए-वतनजबहोगी
अपनेबेगानेबसेंसुम्बुल-ओ-रैहाँहोकर
  - Gulzar Dehlvi
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