maqsad-e-husn hai kya chashm-e-baseerat ke siva | मक़्सद-ए-हुस्न है क्या चश्म-ए-बसीरत के सिवा

  - Gulzar Dehlvi
मक़्सद-ए-हुस्नहैक्याचश्म-ए-बसीरतकेसिवा
वज्ह-ए-तख़्लीक़-ए-बशरक्याहैमोहब्बतकेसिवा
ख़ून-ए-दिलथूकतेफिरतेहैंजहाँमेंशाइ'र
क्यामिलाशहर-ए-सुख़नमेंउन्हेंशोहरतकेसिवा
आजभीइ'ल्म-ओ-फ़न-ओ-शे'र-ओ-अदबहैंपामाल
बा-कमालोंकोमिलाकुछइहानतकेसिवा
हाथमेंजिनकेख़ुशामदकाहैगदलाकश्कोल
उनकोए'ज़ाज़भीमिलजाएँगेइज़्ज़तकेसिवा
रातदिनरंजहैइसबातकासबकोख़ालिक़
अर्सा-ए-हश्रमेंक्यालाएँनदामतकेसिवा
येमशीनोंकीचका-चौंदयेदौर-ए-आलात
इसमेंहरचीज़मुक़द्दरहैमुरव्वतकेसिवा
ग़ोता-ज़नहमरहेकसरतकेसमुंदरमेंफ़ुज़ूल
कौनयेप्यासबुझाएतिरीवहदतकेसिवा
क्याज़मानेमेंदियातूनेअक़ीदतकामआल
हमकोरंज-ओ-ग़म-ओ-अंदोह-ओ-मुसीबतकेसिवा
हमजोअपनाएँज़मानेमेंतवक्कुलयारब
बाबखुलजाएँगेहमपरतिरीरहमतकेसिवा
जबउतरतीहोंसर-ए-अर्शसेआयात-ए-जुनूँ
कौनहोख़ालिक़-ए-अशआ'रमशिय्यतकेसिवा
कितनेहातिममिले'गुलज़ार'ज़मानेमेंहमें
वोकिहरचीज़केवासिफ़थेसख़ावतकेसिवा
  - Gulzar Dehlvi
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