ai masiha-dam tire hote hue kya ho gaya | ऐ मसीहा-दम तिरे होते हुए क्या हो गया

  - Gulzar Dehlvi
मसीहा-दमतिरेहोतेहुएक्याहोगया
बैठे-बिठलाएमरीज़-ए-इश्क़ठंडाहोगया
यूँँमिरासोज़-ए-जिगरदुनियामेंरुस्वाहोगया
शेर-ओ-नग़्मारंग-ओ-निकहतजाम-ओ-सहबाहोगया
चारा-गरकिसकामकीबख़िया-गरीतेरीकिअब
औरभीचाक-ए-जिगरमेराहुवैदाहोगया
हैतिरीज़ुल्फ़-ए-परेशाँयामरीदीवानगी
जोतमाशाकरनेआयाख़ुदतमाशाहोगया
हाएयेताज़ाहवागुलशनमेंकैसीचलपड़ी
बुलबुल-ए-बाग़-ओ-बहाराँरू-ब-सहराहोगया
उम्र-भरकीमुश्किलेंपलभरमेंआसाँहोगईं
उनकेआतेहैंमरीज़-ए-इश्क़अच्छाहोगया
क्यामिरेज़ख़्म-ए-जिगरसेखिलउठीहैचाँदनी
किनचराग़ोंसेज़मानेमेंउजालाहोगया
हरतरहमायूसऔरमहरूमहोकरप्यारसे
जिसकेतुमप्यारेथेवोमौलाकोप्याराहोगया
हमगुनहगारोंकीलग़्ज़िशहश्रमेंकामगई
चश्म-ए-नमकादामन-ए-तरकोसहाराहोगया
इकमिरीशाख़-ए-नशेमनफूँकनेकेवास्ते
किसकीकज-फ़हमीसेघर-भरमेंउजालाहोगया
अबशफ़क़याअब्रका'गुलज़ार'क्यूँँहोइंतिज़ार
उनकीआँखोंसेजोपीनेकाइशाराहोगया
  - Gulzar Dehlvi
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