falaah-e-aadmiyat men saubat sah ke mar jaana | फ़लाह-ए-आदमियत में सऊबत सह के मर जाना

  - Gulzar Dehlvi
फ़लाह-ए-आदमियतमेंसऊबतसहकेमरजाना
यहीहैकामकरजानायहीहैनामकरजाना
जहाँइंसानियतवहशतकेहाथोंज़ब्हहोतीहो
जहाँतज़लीलहैजीनावहाँबेहतरहैमरजाना
यूँँहीदैरहरमकीठोकरेंखातेफिरेबरसों
तिरीठोकरसेलिक्खाथामुक़द्दरकासँवरजाना
सुकून-ए-रूहमिलताहैज़मानेकोतिरेदरसे
बहिश्त-ओ-ख़ुल्दकेमानिंदहमनेतेरादरजाना
हमारीसादा-लौहीथीख़ुदा-बख़्शेकिख़ुश-फ़हमी
किहरइंसानकीसूरतकोमा-फ़ौक़-उल-बशरजाना
येहैरिंदोंपेरहमतरोज़-ए-महशरख़ुदमशिय्यतने
लिखाहैआब-ए-कौसरसेनिखरजानासँवरजाना
चमनमेंइसक़दरसह
मेंहुएहैंआशियाँवाले
किजुगनूकीचमककोसाज़िश-ए-बर्क़-ओ-शररजाना
हमेंख़ार-ए-वतन'गुलज़ार'प्यारेहैंगुल-ए-तरसे
किहरज़र्रेकोख़ाक-ए-हिंदकेशम्सक़मरजाना
  - Gulzar Dehlvi
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