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Gaurav Kumar Aarambh
naya kirdaar jeevan men banaane lag gaya hai
naya kirdaar jeevan men banaane lag gaya hai | नया किरदार जीवन में बनाने लग गया है
- Gaurav Kumar Aarambh
नया
किरदार
जीवन
में
बनाने
लग
गया
है
मुझे
भ्रम
है
ख़ुदा
साजिश
रचाने
लग
गया
है
किसी
ने
पास
आकर
दिल
पे
दस्तक
दी
है
मेरे
कोई
चेहरा
नज़र
अब
चाँद
आने
लग
गया
है
अलग
है
आजकल
कुछ
तो
फ़ज़ाएँ
ख़ुशनुमा
हैं
समय
भी
आजकल
नज़रें
चुराने
लग
गया
है
बताऊँ
राज़
कैसे
मेरे
सारे
दोस्तों
को
वो
कहते
हैं
अकेले
मुस्कुराने
लग
गया
है
- Gaurav Kumar Aarambh
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टूट
चुका
हूँ
अब
मुझको
हल्कान
न
कर
बिखरे
हुए
से
उठने
का
फ़रमान
न
कर
पेड़
जो
रोपे
थे
हमने
साए
के
लिए
सूखे
दरख़्तों
से
फल
के
अरमान
न
कर
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सबको
लगता
है
कि
मुझको
भा
रहीं
तन्हाइयाँ
कौन
मानेगा
कि
मुझको
खा
रहीं
तन्हाइयाँ
मैंने
कर्कश
स्वर
में
ख़ुद
को
जैसे
तैसे
रोका
है
उनको
लगता
है
कि
मीठा
गा
रहीं
तन्हाइयाँ
देखने
पर
भीड़
में
हँसता
हुआ
दिखता
हूँ
मैं
जबकि
अंदर
से
कचोटे
जा
रहीं
तन्हाइयाँ
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Gaurav Kumar Aarambh
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मेरे
वजूद
से
मुकर
रही
है
ज़िंदगी
किसी
अज़ाब
सी
गुज़र
रही
है
ज़िंदगी
Gaurav Kumar Aarambh
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तुझ
सेे
दूरी
अब
फिर
जीना
सीख
रहा
हूँ
जितना
बाहर
चुप
हूँ
अंदर
चीख
रहा
हूँ
Gaurav Kumar Aarambh
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कोई
सिर
ले
के
बैठा
है
ज़माने
भर
का
ग़म
किसी
के
बच्चे
भूखे
हैं
कमाने
भर
का
ग़म
कोई
जूझे
बनाने
को
महल
सुखमय
सभी
किसी
को
फूस
का
छप्पर
बनाने
भर
का
ग़म
मजूरी
खा
गई
आँखों
की
बीनाई
मिरी
पड़े
छाले
रहा
बच्चे
पढ़ाने
भर
का
ग़म
सभी
जीवन
में
आभा
डाल
दी
है
ख़ुशियों
की
उन्हें
मेरे
लिए
इक
लौ
जलाने
भर
का
ग़म
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Gaurav Kumar Aarambh
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