akela din hai koi aur na tanhaa raat hoti hai | अकेला दिन है कोई और न तन्हा रात होती है

  - Ghulam Mohammad Qasir
अकेलादिनहैकोईऔरतन्हारातहोतीहै
मैंजिसपलसेगुज़रताहूँमोहब्बतसाथहोतीहै
तिरीआवाज़कोइसशहरकीलहरेंतरसतीहैं
ग़लतनंबरमिलाताहूँतोपहरोंबातहोतीहै
सरोंपरख़ौफ़-ए-रुस्वाईकीचादरतानलेतेहो
तुम्हारेवास्तेरंगोंकीजबबरसातहोतीहै
कहींचिड़ियाँचहकतीहैंकहींकलियाँचटकतीहैं
मगरमेरेमकाँसेआसमाँतकरातहोतीहै
किसेआबादसमझूँकिसकाशहर-आशोबलिखूँमैं
जहाँशहरोंकीयकसाँसूरत-ए-हालातहोतीहै
  - Ghulam Mohammad Qasir
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