ghairoon ki bastiyon men rahne ko aa rahe hain | ग़ैरों की बस्तियों में रहने को आ रहे हैं

  - Ghazal Ansari
ग़ैरोंकीबस्तियोंमेंरहनेकोरहेहैं
इसदिलकोछोड़करहमदुनियाबनारहेहैं
सखियाँसहेलियाँवोगुज़राजहाँलड़कपन
बैठेबिठाएअबक्यूँसबयादरहेहैं
रोज़ीकीजुस्तुजूमेंअपनोंकोछोड़चलना
माज़ीकेसारेमंज़रआँखोंपेछारहेहैं
रोकाथासबनेहमकोलेकिनरुकसकेहम
अबअजनबीज़मींकेदुखरासरहेहैं
आँखोंपेछारहीहैबरखागएदिनोंकी
गुज़रेदिनोंकेक़िस्सेफिरदिलजलारहेहैं
मिट्टीकीसोंधीख़ुशबूफिरयादरहीहै
मल्हारवोरुतोंकेख़ुदकोसुनारहेहैं
ख़ुशियोंसेख़ुदकोकितनीमहरूमकरलियाहै
परदेसमें'ग़ज़ल'क्यूँहमरंजउठारहेहैं
  - Ghazal Ansari
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