aisi tahreer jo aañsu ki jhadi saabit ho | ऐसी तहरीर जो आँसू की झड़ी साबित हो

  - Ghazal Ansari
ऐसीतहरीरजोआँसूकीझड़ीसाबितहो
फिरतवक़्क़ोकिमोहब्बतभीकड़ीसाबितहो
क्यूँबिछातेहोमिरीराहमेंलफ़्ज़ीकाँटे
दोवोपैग़ामजोमोतीकीलड़ीसाबितहो
तेरीशमशीरकाशाख़-ए-गुल-ए-उल्फ़तपेहोवार
कैसेमुमकिनकिवोफूलोंकीछड़ीसाबितहो
बे-नियाज़ीतिरीबढ़तीहीरहीरोज़-ओ-शब
तेरीफ़ुर्क़तमेंकोईअच्छीघड़ीसाबितहो
मौतआनीहैतोजाएकिसीदिनलेकिन
ज़िंदगीभीकभीराहोंमेंपड़ीसाबितहो
काशजाएयक़ींमेरीमोहब्बतकातुझे
मेरीचाहततिरीहरशयसेबड़ीसाबितहो
रूठकरजबमैंचलूँराह-ए-अदमकीजानिब
राहरोकेतिरीआवाज़खड़ीसाबितहो
दिलमेंचाहतहै'ग़ज़ल'सिर्फ़तुझेपानेकी
कोईतोवस्लकीअनमोलघड़ीसाबितहो
  - Ghazal Ansari
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy