raat-bhar iqaar ki baatein karo | रात-भर इक़रार की बातें करो

  - Ghaus Khah makhah Hyderabadi
रात-भरइक़रारकीबातेंकरो
सुब्ह-दमइंकारकीबातेंकरो
उलझनेंदिलकीबढ़ानीहोंअगर
गेसू-ए-ख़मदारकीबातेंकरो
हैंनिगाहेंसैरऔरअबरूकमाँ
यारबा-हथियारकीबातेंकरो
मह-वशोइतनेबुरेभीहमनहीं
आओहमसेप्यारकीबातेंकरो
सिर्फ़पहलीहीकेदिनदोस्तो
साज़औरझंकारकीबातेंकरो
दूसरीकोबचगएपैसेअगर
कूचा-ओ-बाज़ारकीबातेंकरो
दसतलकचिल्लरअगरबाक़ीरहे
चायपरअख़बारकीबातेंकरो
बीसऔरइक्कीसकोअहबाबसे
चर्ख़-ए-ना-हंजारकीबातेंकरो
क़र्ज़-ए-हसनालेकेतुमउनतीसतक
घरकेकारोबारकीबातेंकरो
तीसकोबातेंकरोइकतीसकी
यादिल-ए-बीमारकीबातेंकरो
आख़िरीदिनख़ूबग़ुस्सेमेंरहो
हुज्जत-ओ-तकरारकीबातेंकरो
फिरउसीशबसुब्हकीउम्मीदमें
मीठीमीठीप्यारकीबातेंकरो
तुमसेयेकिसनेकहाथा'ख़्वाह-मख़ाह'
इसतरहबे-कारकीबातेंकरो
  - Ghaus Khah makhah Hyderabadi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy