itwaar. ki dopahar to hamesha hi achchhii hoti hai | इतवार की दोपहर तो हमेशा ही अच्छी होती है

  - Geetanjali Rai
इतवारकीदोपहरतोहमेशाहीअच्छीहोतीहै
बिल्कुलतुम्हारीतरह
बे-फ़िक्रबे-परवाहआज़ाद
मैंनेभीहमेशाइसेअपनेहीतरीक़ेसेबितायाहै
परजानेक्यूँँ
कुछअर्सेसेजबभीयेसुकूनभरावक़्तअपनेसाथबितानेकीकोशिशकी
तुमदूर-दराज़केवक़्तोंसेनिकलकेचुप-चापमेरेक़रीबबैठजातेहो
मेरेहाथोंकीखुलीकिताबबंदकरके
अपनेहीक़िस्सेसुनानेलगतेहो
दिसम्बरकीसर्दी
बारिशकीबूँदे
औरइतवारकीदोपहर
वहीक़िस्साजोतुमनेजियाथाकभी
मेरेसाथ
लग-भगहरहफ़्तेदोहरातेहो
औरमुझेएहसासभीनहींहोताकिमैंक़ैदहूँ
कुछआज़ादसेलम्होंमेंहमेशाकेलिए
  - Geetanjali Rai
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