ye sehra-e-talab ya besha-e-aashufta-haali hai | ये सहरा-ए-तलब या बेशा-ए-आशुफ़्ता-हाली है

  - Gauhar Hoshiyarpuri
येसहरा-ए-तलबयाबेशा-ए-आशुफ़्ता-हालीहै
कोईदरयूज़ा-गरअपनाकोईतेरासवालीहै
हवादिससेनबर्द-आराईयोंकाकिसकोयाराथा
जुनूँअपनासलामतजिसनेहरउफ़्तादटालीहै
तिरेअग़माज़कीख़ूसीखलीअहल-ए-मुरव्वतने
किमहफ़िलदर्दकीअबसाहब-ए-महफ़िलसेख़ालीहै
हुज़ूरीहोकिमहजूरीमोहब्बतकमनहींउससे
तबअपनाबख़्त-ए-आ'लीथाअबअपनाज़र्फ़-ए-आ'लीहै
नुमूकाजोशकुछनज़्ज़ारा-फ़रमाहोतोहोवर्ना
बहारअबकेबरसख़ुदपाइमाल-ए-ख़ुश्क-सालीहै
किसीकेलुत्फ़-ए-कमकोदेरलगतीहैसिवाहोते
चटकनेतकतोहरगुलकीजिबिल्लतइंफ़िआ'लीहै
शरफ़इतनाकि'ग़ालिब'कीज़मींमेंहैग़ज़ल'गौहर'
वोमज़मूँ-आफ़रीनीहैवोनाज़ुक-ख़यालीहै
  - Gauhar Hoshiyarpuri
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy