mata-e-hosh loot jaane ke din hain | मता-ए-होश लुट जाने के दिन हैं

  - G R Kanwal
मता-ए-होशलुटजानेकेदिनहैं
दिल-ए-नादाँकोसमझानेकेदिनहैं
मैंहरमौसममेंउनसेपूछताहूँ
किधरजाऊँकिधरजानेकेदिनहैं
नया-पनसर्दहोतारहाहै
पुरानीआगसुलगानेकेदिनहैं
बशरकीज़िंदगीकेचारदिनभी
कहाँजीनेकेमरजानेकेदिनहैं
नहींहमवारराह-ए-ज़िंदगानी
कभीखोनेकभीपानेकेदिनहैं
जवानीभीकहाँहैअह्द-ए-इशरत
जवानीमेंभीग़मखानेकेदिनहैं
'कँवल'इसघरमेंतोमकतबखोलो
जहाँबच्चोंकेमुस्कानेकेदिनहैं
  - G R Kanwal
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